हमारा वतन - बाल कविता
बाल कविता - हमारा वतन
सत्य की यह धरा , शांतिमय ये गगन ।
प्रीति का है समुंदर हमारा वतन
पासबाँ है हिमालय सिरहाने खड़ा ।
छू रहा आसमाँ सरहदों पे अड़ा ।
चाँद -सूरज करें रोज जिसको नमन ।
प्रीति का है समुंदर हमारा वतन ।
पावनी मात गंगा जहाँ बह रही ।
कृष्ण - राधा की यमुना कथा बह रही ।
धो रहा हिंद सागर भी जिसके चरण ।
प्रीति का है समुंदर हमारा वतन ।
ज्ञानियों , ध्यानियों , त्यागियों की धरा ।
वीरता की जननि भारती उर्वरा ।
उच्च आदर्श श्रीराम का आचरण ।
प्रीति का है समुंदर हमारा वतन
आइए गीत गाएँ वतन के लिए ।
जिंदगी हम लुटाएँ वतन के लिए ।
मेहनती रंग दे के सँवारा चमन ।
प्रीति का है समुंदर हमारा वतन ।

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