' नटखट मेमना ' हिंदी कहानी

एक मेमना अपनी माँ से बोला , " माँ , आज मैं नानी के घर जाऊँगा । " माँ बोली , “ बेटा , तेरी नानी का घर जंगल के उस पार है । जंगल में बड़े भयंकर जानवर रहते हैं । वे तुझे खा जाएँगे । " मेमना बोला , " माँ , तू चिंता मत कर । मैं बड़ा चालाक हूँ भयंकर जानवर मेरा बाल भी बांका नहीं कर सकेंगे । 

Natkhat-Memna-Hindi-Kahani


" यह कहकर मेमना फुदकता - फुदकता नानी के घर चल पड़ा । रास्ते में जंगल के किनारे उसे एक भेड़िया मिला । भेड़िये ने मेमने को देखते ही झपटकर कहा , " मैं तुझे खाऊँगा । " मेमना बोला , " मैं अपनी नानी के घर जा रहा हूँ । वहाँ खूब दूध - मलाई खाकर जब मोटा होकर लौटूंगा , तब मुझे खा लेना । " भेड़िया बोला , " अच्छा , जाओ । " वहाँ से फुदकता - फुदकता मेमना आगे चला । 

बीच जंगल में उसे एक भालू मिला । भालू ने मेमने को देखकर कहा , " मैं तुझे खाऊँगा । ' ' परंतु मेमना बोला , " मैं अपनी नानी के घर जा रहा हूँ । वहाँ खूब दूध - मलाई खाकर जब मोटा होकर लौटूंगा , तब मुझे खा लेना । " भालू भी मान गया और मेमना उछलता - कूदता आगे चला , तो जंगल के पास उसे एक शेर मिला । 

शेर ने भी कहा , " मेमने , मैं तुझे खाऊँगा । " किंतु मेमना साहस करके बोला , " शेर दादा , मैं अपनी नानी के घर जा रहा हूँ । वहाँ खूब दूध - मलाई खाकर जब मोटा होकर लौटूंगा , तब मुझे खा लेना । " शेर ने कहा , " जाओ । " मेमना अपनी नानी के घर पहुँच गया । उसकी नानी ने उसे खूब दूध - मलाई और नरम नरम पत्तियाँ खाने को दी । 

मेमना खूब मोटा हो गया । उसने अपनी नानी से कहा , " नानी - नानी , मुझे एक ढोलकी मँगा दो । मैं अब अपने घर वापस जाऊँगा । " उसकी नानी ने एक ढोलकी मँगाकर उसमें मेमने को बंद कर दिया । लुढ़कती लुढ़कती ढोलकी जंगल के किनारे पहुँची तो शेर ने पूछा , " ढोलकी - ढोलकी , तुझे कहीं मेमना मिला था ? " ढोलकी रुक गई और उसके भीतर से मेमना बोला , " मैं क्या जानूँ कौन मेमना , मैं क्या जानें क्या हो तुम । 

चल मेरी ढोलक ठुम - ठुम - ठुम , चल मेरी ढोलक ठुम - ठुम - तुम ॥ " शेर चुप हो गया और ढोलकी लुढ़कती हुई आगे चली । कुछ दूर आगे जाकर उसे भालू मिला । भालू ने पूछा , * " ढोलकी , तुम्हें कहीं मेमना मिला ? " ढोलकी के भीतर से मेमना बोला , " मैं क्या जानूँ कौन मेमना , मैं क्या जानें क्या हो तुम । 

चल मेरी ढोलक ठुम - ठुम - ठुम , चल मेरी ढोलक ठुम - ठुम - ठुम ॥ " भालू भी चुप हो गया । और आगे आने पर उसे भेड़िया मिला । भेड़िये ने पूछा , " ढोलकी , ढोलकी , तुझे कहीं मेमना मिला ? " ढोलकी रुक गई और उसमें से मेमने ने कहा , " मैं क्या जानूँ कौन मेमना , मैं क्या जानूँ क्या हो तुम । 

चल मेरी ढोलक ठुम ठुम - ठुम , चल मेरी ढोलक ठुम - ठुम - ठुम ॥ " भेड़िया बड़ा चालाक था । उसने मेमने की आवाज पहचान ली । वह दौड़कर थोड़ा आगे आया और राह में एक खूटी गाड़कर झाड़ी में छिपकर बैठ गया । ढोलकी झूटी से टकराकर चूर चूर हो गई । मेमना बाहर निकल आया । 

उसे देखकर भेड़िया , भालू और शेर बोले , " अब तो हम तुम्हें खाएँगे । " परंतु मेमना घबराया नहीं । उसने तीनों से कहा , " एक काम करो । तुम तीनों मिलकर रेत का एक ढेर लगाओ । मैं उस पर खड़ा हो जाऊँगा । फिर तुम मुझको खा लेना । " शेर , भेड़िया और भालू ने वैसा ही किया । 

उन्होंने रेत का एक ढेर लगा दिया और मेमना उस पर खड़ा होकर बोला , " अब तुम तीनों मुझको खा लो ! " किंतु जब वे तीनों मेमने को खाने के लिए मुंह फाड़कर दौड़े तो मेमने ने जल्दी - जल्दी इतनी रेत उड़ा दी कि उनके मुँह और आँखें रेत से भर गए । शेर , भेड़िया और भालू हाय - हाय करते हुए भाग गए और मेमना अपनी जान बचाकर फुदकता हुआ माँ के पास लौट आया । 

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