प्रेमचंद के बारे में हिंदी मे, Premchand ke bare mein Hindi mein
प्रेमचंद के बारे में हिंदी मे, Premchand ke bare mein Hindi mein
![]() |
| प्रेमचंद के बारे में हिंदी मे, Premchand ke bare mein Hindi mein |
प्रेमचंद के बारे में जानिये :
प्रेमचंद का जन्म :
जुलाई , 1880 को बनारस से लगभग मील दूर स्थित गाँव लमही में हुआ ।
प्रेमचंद की मृत्यु :
18 अक्तूबर , 1930 को उन्होंने अपने जीवन की अंतिम सांस ली । उस समय वे छप्पन वर्ष के थे ।
प्रेमचंद के बारे में :
प्रेमचंद आधुनिक कथा साहित्य में नवयुग के प्रवर्तक थे । प्रेमचंद का जन्म । जुलाई , 1880 को बनारस से लगभग मील दूर स्थित गाँव लमही में हुआ । यह पिता अजाययराय और माँ आनंदी देवी की संतान पाउनके तीन बहने और एक छोटा भाई भी था ।उनकी दो बहने बचपन मही अकाल मृत्युकी शिकार हो गई थी । प्रेमचंद का मूल नाम धनपतराय था , किंतु परिवारजन उन्हें , ' नवाब ' कहते थे । जब यह पाँच वर्ष के थे , उनकी माँ का देहांत हो गया । उसके बाद उन्हें एक करीबी गाँव के मदरसे में पढ़ने के लिए दाखिल कर दिया गया ।
उस समय शिक्षा में फारसी और उर्दू की खास अहमियत होती थी । उनके लिए मदरसे की यह जिंदगी बड़ी दिलचस्प साबित हुई । माँ की मृत्यु के बाद नवाब को सर्वाधिक स्नेह अपनी बड़ी बहन से मिला था।करीब चौदह साल की उम्र में प्रेमचंद की शादी कर दी गई । उन , हिंदी नहीं आती थी ।
वह उर्दू उपन्यासों के दीवाने थे । इसी जमाने में उन्होंने ' तिलिस्म - ए - होशरुबा ' की भी कई जिल्दे पर डाली । प्रेमचंद ने सन् 1901 में कहानी लिखना शुरू किया । उन्होंने पहली कहानी अनमोल रल ' उर्दू में लिखी थी , जो बहुत चर्यित हुई । सन् 1907 में उनका पहला उपन्यास ' वरदान ' प्रकाशित हुआ ।
उनका अगला उपन्यास ' प्रतिज्ञा ' विषयाओं की समस्याओं पर आधारित था । इस बीच उन्होंने देश प्रेम की भावना से ओत प्रोत कई कहानियाँ लिखी , जो पुस्तकाकार सौजे वतन ' में सन् 1908 मैं बेहद चर्चित हुई । सन् 1916 में प्रेमचंद का बहुचर्चित उपन्यास ' सेवासदन ' प्रकाशित हुआ ।
सन् 1920 में महात्मा गांधी के विचारों एवं कार्यों से प्रभावित होकर प्रेमचंद ने नौकरी छोड़ दी और असहयोग आंदोलन में कूद पड़े तथा जेल भी गए । इसके बाद उन्होंने कुछ अरसे के लिए खादी की दुकान खोली ; मगर जब उनका भी कोई नतीजा न निकला तो बनारस में कुछ महीने तक उन्होंने हिंदी मासिक ' मर्यादा ' का संपादन किया ।
बाद में उन्होंने माधुरी, हंस, जागरण आदि पत्रिकाओं का भी संपादन किया । सन 1925 में प्रेमचंद का वृहद् ठपन्यास ' रंगभूमि ' प्रकाशित हुआ । इसके बाद सन् 1928 में ' कायाकल्प, 1931 मैं 'गवन ' , 1932 में कर्मभूमि ' , 1933 में ' निर्मला ' और 1936 में ' गोदान ' प्रकाशित हुए ।
' गोदान ' प्रेमचंद का श्रेष्ठ उपन्यास माना जाता है । प्रेमचंद का प्रसिद्ध कहानी संग्रह ' मानसरोवर ' आठ भागों में है । उपन्यास और कहानी के अलावा प्रेमचंद ने नाटक , निबंध , जीवनी आदि विधाओं में भी अपनी लेखनी चलाई है । गरीबी से निजात पाने के लिए उन्होंने फिल्म उद्योग मलखन का कार्य किया ।
सन 1979 में सरकार ने प्रेमचंद को रायसाहब ' की उपाधि देनी चाही , लेकिन उन्होंने उसे अस्वीकार कर दिया। 18 अक्तूबर , 1930 को उन्होंने अपने जीवन की अंतिम सांस ली । उस समय वे छप्पन वर्ष के थे ।
प्रेमचंद के बारे में हिंदी मे, Premchand ke bare mein Hindi mein

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें