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सम्राट अशोक इन हिंदी, samrat ashok in hindi

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सम्राट अशोक इन हिंदी : जीवन परिचय सम्राट अशोक इन हिंदी सम्राट अशोक इन हिंदी samrat ashok in hindi सम्राट अशोक इन हिंदी samrat ashok in hindi सम्राट अशोक इन हिंदी सम्राट अशोक की जीवनी हिन्दी में जानिये बिन्दुसार का उत्तराधिकारी अशोक महान हुआ जो 269 ईसा पूर्व में मगध की राजगद्दी पर बैठा । राजगद्दी पर बैठने के समय अशोक अवन्ति का राज्यपाल था । मास्की एवं गुर्जरा अभिलेख में अशोक का नाम अशोक मिलता है । पुराणों में अशोक को अशोकवर्धन कहा गया है । अशोक अपने अभिषेक के 8 वें वर्ष लगभग 261 ईसा पूर्व में कलिंग पर आक्रमण किया और कलिंग की राजधानी तोसली पर अधिकार कर लिया । “ प्लिनी का कथन है कि मिस्र का राजा फिलाडेल्फस [ टॉलमी II ] ने पाटलिपुत्र डियानीसियस नाम का एक राजदूत भेजा था । ( अशोक के दरबार में ) उपगुप्त नामक बौद्ध भिक्षु ने अशोक को बौद्ध धर्म की दीक्षा दी । अशोक ने आजीवकों को रहने हेतु बराबर की पहाड़ियों में चार गुफाओं का निर्माण करवाया , जिनका नाम कर्ज , चोपार , सुदामा तथा विश्व झोपड़ी था । अशोक के पौत्र दशरथ ने आजीविकों को नागार्जुन गुफा प्रदान की थी । अशोक के 7 वें स्तम्भ लेख में आजीविकों क...

Bindusara Biography in English

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Know Bindusara Biography in English biography of Bindusara : Who was Bindusara ? Today I am going to tell you some facts related to the life of Bindusara , which are asked in many competitive examinations. Biography of Bindusara Biography of Bindusara : Who was Bindusara?  Biography of Bindusara Biography of Bindusara in English Chandragupta Maurya was succeeded by Bindusara. Who sat on the throne of Magadha in 298 BC. Bindusara is known by the name of Amitraghata. Amitraghata means destroyer of enemies. Bindusara was a follower of Ajivak sect. In the Vayu Purana, Bindusara is called Bhadrasara (or heir). According to Strabo, the Syrian king Antiochus sent an ambassador named Dimachus to Bindusara's court. He is considered to be the successor of Megasthenes. In Jain texts, Bindusara has been called Simhasen. There is a description of two revolts in Taxila (between the Indus and Jhelum rivers) during the reign of Bindusara. To suppress this rebellion, Bindusara first sent Susim and ...

सिकन्दर कौन था इन हिन्दी sikandar kaun tha in hindi

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इतिहास में सिकंदर कौन था ? सिकंदर कौन था इन हिन्दी सिकंदर का जन्म 356 ईसा पूर्व में हुआ. सिकंदर  के पिता का नाम फिलिप था.  फिलिप 359 ईसा पूर्व में मकदूनिया का शासक बना.  सिकन्दर कौन था, sikandar kaun tha , sikandar kaun tha in hindi सिकन्दर कौन था इन हिन्दी sikandar kaun tha in hindi  सिकन्दर कौन था इन हिन्दी sikandar kaun tha in hindi  सिकन्दर कौन था हिन्दी में जानिये सिकन्दर का जन्म 356 ईसा पूर्व में हुआ ।  सिकन्दर के पिता का नाम फिलिप था ।  फिलिप 359 ईसा पूर्व में मकदूनिया का शासक बना | सिकंदर की हत्या 329 ईसा पूर्व में कर दी गयी ।  सिकन्दर अरस्तू का शिष्य था ।  सिकन्दर ने भारत - विजय का अभियान 326 ईसा पूर्व में प्रारंभ किया ।  सिकन्दर का सेनापति सेल्यूकस निकेटर था ।  सिकन्दर को पंजाब के शासक पोरस के साथ युद्ध करना पड़ा , जिसे हाइडेस्पीज के युद्ध या झेलम ( वितस्ता ) का युद्ध के नाम से जाना जाता है ।  सिकन्दर की सेना ने व्यास नदी के पश्चिमी तट पर पहुँचकर उसे पार करने से इन्कार कर दिया ।  सिकन्दर स्थल मार्ग द्वारा 325 ईसा...

सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार इन हिन्दी super 30 Ke sansthapak Anand Kumar in Hindi

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सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार के बारे में कौन है सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार  ?  सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार इन हिन्दी super 30 Ke sansthapak Anand Kumar in Hindi सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार इन हिन्दी  : आज हम आपको भारत के प्रसिद्ध गणितज्ञ , शिक्षाविद् आनंद कुमार से मिलवाते हैं । उनका जन्म 01 जनवरी , 1973 को पटना , बिहार में हुआ था । आनंद कुमार ने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की । वहीं पर उन्हें गणित से अत्यधिक लगाव हो गया ।  सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार इन हिन्दी super 30 Ke sansthapak Anand Kumar in Hindi सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार इन हिन्दी super 30 Ke sansthapak Anand Kumar in Hindi सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार के बारे में हिंदी में जानिये?  स्नातक की शिक्षा के दौरान उन्होंने संख्या सिद्धांत पर कुछ पेपर जमा किए , जिन्हें मैथमैटिकल स्पेक्ट्रम तथा द मैथमैटिकल गजट में प्रकाशित किया गया । उनकी योग्यता से उनका दाखिला कैंब्रिज विश्वविद्यालय में भी हो गया था , लेकिन अचानक पिता की मृत्यु व खराब आर्थिक स्थिति के कारण वे वहाँ पढ़ने न जा सके । लेकिन उनक...

परम वीर चक्र से सम्मानित सूबेदार संजय कुमार

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परम वीर चक्र से सम्मानित सूबेदार संजय कुमार परम वीर चक्र से सम्मानित सूबेदार संजय कुमार के बारे में जानिये?  परम वीर चक्र वीरता का सर्वोच्च पुरस्कार है । यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले शूरवीर निस्संदेह सही मायनों में विजेता होते हैं , क्योंकि वे अपना सर्वस्व समर्पित कर मातृभूमि की रक्षा करते हैं । सूबेदार संजय कुमार भी ऐसे ही भारतीय सेना के एक बहादुर सिपाही हैं । उनका जन्म 3 मार्च , 1976 को हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के कलोल बल्किन ग्राम में हुआ ।  वे सेना में शामिल होना चाहते थे । सेना में शामिल होने से पहले उन्होंने दिल्ली में टैक्सी चालक का काम भी किया था । सेना में भर्ती होने से पहले उन्हें तीन बार अस्वीकृति का सामना भी करना पड़ा था । लेकिन उनके हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने हार नहीं मानी और आखिर अपनी वीरता एवं जज्वे से सेना में शामिल होने के सपने को वास्तविकता में पूर्ण कर लिया ।  वे 4 व 5 जुलाई , 1999 को कारगिल में मस्को वैली पॉइंट 5875 पर फ्लैट टॉप पर 11 साथियों के साथ तैनात थे । यहाँ शत्रु ऊपर पहाड़ी से हमला कर रहा था । इस टीम में उनके 11 साथियों में से दो...

मोहम्मद हसन ने बनाया स्मार्ट डस्टबिन ?

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मोहम्मद हसन ने बनाया स्मार्ट डस्टबिन : स्वच्छ भारत अभियान ने प्रत्येक भारतीय को न केवल स्वच्छ और स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित किया है , बल्कि इस बात के लिए भी प्रेरित किया है कि देशवासी समाज एवं पर्यावरण को भी स्वच्छ रखने में पूर्ण योगदान दें । इसके लिए विद्यार्थी उत्साह के साथ काम कर रहे हैं । ऐसे ही एक विद्यार्थी हैं - मोहम्मद हसन । आप उनकी उम्र सुनेंगे तो और भी दंग रह जाएँगे ।  वे अभी केवल 12 साल के हैं , लेकिन इतनी कम आयु में ही उन्होंने एक स्मार्ट डस्टबिन बनाया है । मोहम्मद हसन के द्वारा बनाए गए इस डस्टबिन की खास बात यह है कि कचरा भर जाने पर यह खाली करने के लिए अलर्ट ANI भेजता है । इसे वाई फाई से कनेक्ट किया जा सकता है । हसन को इस डस्टबिन को बनाने का आइडिया स्वच्छ भारत अभियान से जुड़े एक वीडियो को देखकर ही आया था ।  इस डस्टबिन में अल्ट्रासोनिक सेंसर लगे हैं , जो यह पता लगाते हैं कि कचरा कितना भरा है । इसका विश्लेषण करने के बाद सेंसर डस्टबिन में लगी एलसीडी में जानकारी भेजते हैं । कूड़े से भर जाने पर डस्टबिन सीधे म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन को कचरा उठाने के लिए संदेश भेजता है । ह...

डॉक्टर शंकर अबाजी भिसे इन हिन्दी

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डॉक्टर शंकर अबाजी भिसे इन हिन्दी डॉक्टर शंकर आबाजी भिसे भारत के एक महान वैज्ञानिक एवं किए । उन्हें ' भारत का एडीसन ' के नाम से भी जाना जाता है । । उन्होंने लगभग 40 आविष्कारों पर पेटेंट लिया था । डॉक्टर शंकर अबाजी भिसे का जन्म 29 अप्रैल , 1867 को मुंबई में हुआ था ।  बचपन से ही उन्हें विज्ञान से काफी लगाव था । वे समय मिलने पर कुछ - न - कुछ करते रहते थे । केवल 14 साल की आयु में ही उन्होंने अपने घर में ही कोयला गैस बनाने वाले उपकरण का निर्माण किया । 16 साल की आयु में उन्होंने आविष्कार के लिए इंग्लैंड या अमेरिका जाने का फैसला किया ।  1890-95 के दौरान उन्होंने ऑप्टिकल इल्यूजन पर कार्य किया । उन्होंने एक ठोस पदार्थ के दूसरे ठोस पदार्थ में परिवर्तित होने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया । अल्फ्रेड नामक वैज्ञानिक ने उनके आविष्कार की सराहना की और उन्हें ' गोल्ड मेडल ' से सम्मानित किया गया । मुंबई में उन्होंने एक साइंस क्लब ' की स्थापना की ।  उन्होंने विज्ञान - पत्रिका विविध कला प्रकाश ' का प्रकाशन मराठी भाषा में भी किया । इस पत्रिका के द्वारा वे लोगों को सरल भाषा में विज्...

अशोक चक्र विजेता लेफ्टिनेंट त्रिवेणी सिंह को जानिये?

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अशोक चक्र विजेता लेफ्टिनेंट त्रिवेणी सिंह को जानिये : लेफ्टिनेंट त्रिवेणी सिंह का जन्म 1 फरवरी , 1978 को झारखंड के हुआ था । वह सेवानिवृत्त कैप्टन जनमेजय सिंह ठाकुर के पुत्र थे । उनकी माँ का नाम श्रीमती पुष्पलता था । वे लोग मूल रूप से पंजाब के पठानकोट के रहनेवाले थे । उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय , लुधियाना से कृषि विज्ञान में बी.एस.सी. की डिग्री प्राप्त की थी ।  त्रिवेणी सिंह को 8 दिसंबर , 2001 को जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री में कमीशन प्राप्त हुआ।वे मार्शल आर्ट में पारंगत थे और अपने छात्र जीवन में ही राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीत चुके थे । लेफ्टिनेंट त्रिवेणी सिंह अपनी यूनिट के सहायक अधिकारी थे और जिस कमरे में वह थे , वह कमांडिंग ऑफिसर के ऑफिस के साथ लगा हुआ था ।  उन्हें जम्मू रेलवे स्टेशन पर आत्मघाती आतंकवादियों के आने की खबर मिली । कमांडिंग ऑफिसर ने उन्हें आदेश दिया कि वे अफसरों और सैनिकों को अलर्ट करें और सभी जम्मू रेलवे स्टेशन की ओर कूच करें । किंतु लेफ्टिनेंट त्रिवेणी सिंह को लगा कि इस पूरी प्रक्रिया में काफी विलंब हो सकता है ,  अत : उन्होंने उन आत्मघाती ...

कल्पना चावला इन हिन्दी, Kalpana Chawla in Hindi

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कल्पना चावला इन हिन्दी, Kalpana Chawla in Hindi कल्पना चावला के बारे में हिंदी में जानिये : दोस्तों , आप सब बड़े होकर एक ऐसा सितारा बनना चाहते हो न , जो सबका लाडला हो और जिसे सारी दुनिया याद करे । हर बच्चा बड़ा होकर मनचाही कामयाबी हासिल कर सकता है , यदि वह लगन से अपनी पढ़ाई करे । आप सबने कल्पना चावला का नाम तो सुना होगा । वही कल्पना चावला , जो सितारों से बातें करती थी ।  कल्पना चावला इन हिन्दी, Kalpana Chawla in Hindi कल्पना चावला इन हिन्दी, Kalpana Chawla in Hindi उसने अपना कॅरियर ऐसे क्षेत्र में बनाया , जो बेहद कठिन होता है । वह सफल एस्ट्रोनॉट बनी । उसका जन्म 1 जुलाई , 1961 को हरियाणा के करनाल में हुआ था । कल्पना अपने भाई - बहनों में सबसे छोटी थी । उसने करनाल के टैगोर बाल निकेतन स्कूल से अपनी पढ़ाई की । उसने चंडीगढ़ में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया ।  इसके बाद उसके अंदर उड़ान भरने की रुचि पैदा हुई । उड़ान की कल्पना को साकार करने के लिए कल्पना ने चंडीगढ़ स्थित अपने कॉलेज में एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया । वह एरोनॉटिक्स में अपना भविष्य बनाने के लिए बेहद...

श्रीनिवास रामानुजन इन हिन्दी, Sri Nivas Ramanujan in Hindi

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श्रीनिवास रामानुजन इन हिन्दी, Sri Nivas Ramanujan in Hindi श्रीनिवास रामानुजन का जन्म :  22 दिसंबर , 1887 को मद्रास में हुआ था ।  श्रीनिवास रामानुजन का मृत्यु :  26 अप्रैल , 1920 को मात्र 33 साल की अल्पायु में ही उनका निधन हो गया श्रीनिवास रामानुजन इन हिन्दी, Sri Nivas Ramanujan in Hindi श्रीनिवास रामानुजन के बारे में : आज गणित विषय को पसंद करनेवाले बच्चों के लिए हम एक ऐसे गणितज्ञ को ढूंढकर लाए हैं , जिन्होंने बहुत ही कम समय में गणित की नई - नई खोजें कर ली थीं । आप इशारा तो समझ ही गए होंगेन । जी हाँ , हम बात कर रहे हैं श्रीनिवास रामानुजन की । श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर , 1887 को मद्रास में हुआ था ।  उनका बचपन अभावों में बीता । बचपन से ही रामानुजन को याददाश्त गजब की थी । उन्हें सभी विषयों में गणित सर्वाधिक पसंद था । एक बार विद्यालय में अध्यापक कक्षा में विद्यार्थियों से बोले कि यदि तीन केलों को तीन विद्यार्थियों में बाँटा जाए तो एक विद्यार्थी के हिस्से में कितने केले आएंगे ? सभी विद्यार्थी चिल्लाकर खोले , " हर विद्यार्थी के पास एक - एक केला आएगा ।  "...

प्रेमचंद के बारे में हिंदी मे, Premchand ke bare mein Hindi mein

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प्रेमचंद के बारे में हिंदी मे, Premchand ke bare mein Hindi mein प्रेमचंद के बारे में हिंदी मे, Premchand ke bare mein Hindi mein प्रेमचंद के बारे में जानिये : प्रेमचंद का जन्म :  जुलाई , 1880 को बनारस से लगभग मील दूर स्थित गाँव लमही में हुआ ।  प्रेमचंद की मृत्यु :    18 अक्तूबर , 1930 को उन्होंने अपने जीवन की अंतिम सांस ली । उस समय वे छप्पन वर्ष के थे । प्रेमचंद के बारे में : प्रेमचंद आधुनिक कथा साहित्य में नवयुग के प्रवर्तक थे । प्रेमचंद का जन्म । जुलाई , 1880 को बनारस से लगभग मील दूर स्थित गाँव लमही में हुआ । यह पिता अजाययराय और माँ आनंदी देवी की संतान पाउनके तीन बहने और एक छोटा भाई भी था ।  उनकी दो बहने बचपन मही अकाल मृत्युकी शिकार हो गई थी । प्रेमचंद का मूल नाम धनपतराय था , किंतु परिवारजन उन्हें , ' नवाब ' कहते थे । जब यह पाँच वर्ष के थे , उनकी माँ का देहांत हो गया । उसके बाद उन्हें एक करीबी गाँव के मदरसे में पढ़ने के लिए दाखिल कर दिया गया ।  उस समय शिक्षा में फारसी और उर्दू की खास अहमियत होती थी । उनके लिए मदरसे की यह जिंदगी बड़ी दिलचस्प साबित ...

बंकिमचंद्र चटर्जी इन हिन्दी, bankim chandran chatterjee in hindi

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बंकिमचंद्र चटर्जी के बारे में हिन्दी में जानिये : बंकिमचंद्र चटर्जी इन हिन्दी, bankim chandran chatterjee in hindi बंकिमचंद्र चटर्जी के बारे में जानिए : दोस्तों, आपको मालूम है कि हमारा राष्ट्रीय गीत ' वंदे मातरम् ' किसने लिखा था ? बंकिमचंद्र चटर्जी ने ।  बंकिमचंद्र चटर्जी इन हिन्दी bankim chandran chatterjee in hindi

UPSC topper Harpreet Singh aur Rajasthan ke Ramjal Meena

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हरप्रीत सिंह और रामजल मीणा के बारे में,  हरप्रीत सिंह और रामजल मीणा के बारे में,  हरप्रीत सिंह और रामजल मीणा कौन है?    कौन है हरप्रीत सिंह दोस्तों यह बताने से पहले कि  हरप्रीत सिंह कौन हैं  आपको यह बताते हैं कि मनचाहे सपने देखें डा.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का कहना था , “ सपने वे नहीं होते , जो आप सोने के बाद देखते हैं , सपने वे होते ' हैं , जो आपको सोने नहीं देते । " ऐसा नहीं है कि केवल महान हस्तियों पर ही यह बात लागू होती है ।  आज तो हमारे इर्द - गिर्द के अनेक लोग ऐसे हैं , जो इस बात को मानते हैं और कड़ी मेहनत कर अपनी किस्मत को अपने हाथों में कैद कर लेते हैं । किस्मत व्यक्ति खुद बनाता है । यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम गुलाबों की टहनियों पर काँटे देखते हैं अथवा कँटीली झाड़ियों पर गुलाब । संकल्प के धनी व्यक्ति समस्याओं से ही अवसर उत्पन्न कर लेते हैं ।  हरप्रीत सिंह ने वर्ष 2016 में  यू.पी.एस.सी.  की परीक्षा के माध्यम से सीमा सुरक्षा बल में असिस्टेंट कमांडेंट का पद प्राप्त किया । उनकी नियुक्ति भारत बांग्लादेश सीमा ...

क्रिकेट के हरफनमौला कपिल देव, Cricketer Kapil Dev in hindi

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क्रिकेट के हरफनमौला कपिल देव, Cricketer Kapil Dev in hindi क्रिकेट एक ऐसा खेल है , जो बच्चों से लेकर वृद्धों तक और युवाओं से लेकर महिलाओं तक में बराबर लोकप्रिय है । जिस तरह क्रिकेट लोगों को पसंद है कपिल देव के बारे में,  कपिल देव,   कपिल देव कौन है. क्रिकेट के हरफनमौला कपिल देव, Cricketer Kapil Dev in hindi क्रिकेट के हरफनमौला कपिल देव, Cricketer Kapil Dev in hindi क्रिकेट के हरफनमौला कपिल देव क्रिकेट एक ऐसा खेल है , जो बच्चों से लेकर वृद्धों तक और युवाओं से लेकर महिलाओं तक में बराबर लोकप्रिय है । जिस तरह क्रिकेट लोगों को पसंद है , उसी तरह क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी भी उन्हें बेहद पसंद होते हैं । ऐसे में अगर बात हो कपिल देव की तो फिर कहना ही क्या ! बेशक कपिल देव को क्रिकेट से संन्यास लिये हुए काफी समय हो चुका है , लेकिन जब भी क्रिकेट की बात आती है तो कपिल देव का चेहरा स्वयं ही सामने आ जाता है ।  कपिल देव ने पूरी दुनिया में भारत को क्रिकेट के क्षेत्र में अलग पहचान दिलाई थी । इतना ही नहीं , भारतीय क्रिकेट टीम को सन् 1983 में एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट श्रृंखला मे...