UPSC topper Harpreet Singh aur Rajasthan ke Ramjal Meena
हरप्रीत सिंह और रामजल मीणा के बारे में,
हरप्रीत सिंह और रामजल मीणा के बारे में,
हरप्रीत सिंह और रामजल मीणा कौन है?
कौन है हरप्रीत सिंह
दोस्तों यह बताने से पहले कि हरप्रीत सिंह कौन हैं आपको यह बताते हैं कि मनचाहे सपने देखें डा.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का कहना था , “ सपने वे नहीं होते , जो आप सोने के बाद देखते हैं , सपने वे होते ' हैं , जो आपको सोने नहीं देते । " ऐसा नहीं है कि केवल महान हस्तियों पर ही यह बात लागू होती है ।
आज तो हमारे इर्द - गिर्द के अनेक लोग ऐसे हैं , जो इस बात को मानते हैं और कड़ी मेहनत कर अपनी किस्मत को अपने हाथों में कैद कर लेते हैं । किस्मत व्यक्ति खुद बनाता है । यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम गुलाबों की टहनियों पर काँटे देखते हैं अथवा कँटीली झाड़ियों पर गुलाब । संकल्प के धनी व्यक्ति समस्याओं से ही अवसर उत्पन्न कर लेते हैं ।
हरप्रीत सिंह ने वर्ष 2016 में यू.पी.एस.सी. की परीक्षा के माध्यम से सीमा सुरक्षा बल में असिस्टेंट कमांडेंट का पद प्राप्त किया । उनकी नियुक्ति भारत बांग्लादेश सीमा पर हुई ।
24 घंटे की सख्त ड्यूटी के बाद उनकी आँखों में सतरंगी सपने थे , जो उन्हें सोने नहीं देते थे ।
वे खाली समय में पढ़ाई करते । उन्होंने वर्ष 2017 में सिविल सर्विस की परीक्षा दी और वे पास हो गए , लेकिन वे अपने रैंक से संतुष्ट नहीं हुए और दोबारा इस परीक्षा में बैठे |
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वर्ष 2018 में वे टॉप 20 में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहे ।
इसी तरह 34 साल के रामजल मीणा राजस्थान के एक दूरस्थ गाँव के दिहाड़ी मजदूर के बेटे हैं । उनका विवाह कम उम्र में ही हो गया था । वे तीन बेटियों के पिता हैं । उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से अंडरग्रैजुएट डिग्री प्राप्त की । इसके बाद दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से एम.ए. में प्रवेश लिया । वे दिल्ली आ गए और यहाँ पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में सुरक्षाकर्मी की नौकरी करने लगे ।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय का माहौल देखकर उनके मन में भी पढ़ाई करने की उमंगें हिलोरें लेने लगीं । बस फिर क्या था , उन्होंने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से प्रवेश परीक्षा पास की और रशियन भाषा में बी.ए. करने लगे।अब उनका सपना बी.ए. करने के बाद अच्छी नौकरी तलाश करने का है । इन लोगों ने परेशानियों को कभी अपने मार्ग की बाधा नहीं समझा ।
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इन्होंने अपने सपनों को इतना बड़ा कर लिया कि बाधाओं ने उनके पैरों में पंख लगा दिए । इन्हीं पंखों के माध्यम से इन्होंने धीरे - धीरे उड़ान भरी और फिर स्वयं को इतना मजबूत बना लिया कि अब ये दूसरों को भी पंख प्रदान करने की सामर्थ्य रखते हैं ।
ऐसा ही होना चाहिए । आप सभी विद्यार्थी अपनी क्षमताओं को पहचानें और उसके अनुरूप कार्य करें। आपको सफलता अवश्य मिलेगा |


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