क्रिकेट के हरफनमौला कपिल देव, Cricketer Kapil Dev in hindi

क्रिकेट के हरफनमौला कपिल देव, Cricketer Kapil Dev in hindi

क्रिकेट एक ऐसा खेल है , जो बच्चों से लेकर वृद्धों तक और युवाओं से लेकर महिलाओं तक में बराबर लोकप्रिय है । जिस तरह क्रिकेट लोगों को पसंद है

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क्रिकेट के हरफनमौला कपिल देव, Cricketer Kapil Dev in hindi

क्रिकेट के हरफनमौला कपिल देव, Cricketer Kapil Dev in hindi

क्रिकेट के हरफनमौला कपिल देव क्रिकेट एक ऐसा खेल है , जो बच्चों से लेकर वृद्धों तक और युवाओं से लेकर महिलाओं तक में बराबर लोकप्रिय है । जिस तरह क्रिकेट लोगों को पसंद है , उसी तरह क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी भी उन्हें बेहद पसंद होते हैं । ऐसे में अगर बात हो कपिल देव की तो फिर कहना ही क्या ! बेशक कपिल देव को क्रिकेट से संन्यास लिये हुए काफी समय हो चुका है , लेकिन जब भी क्रिकेट की बात आती है तो कपिल देव का चेहरा स्वयं ही सामने आ जाता है । 

कपिल देव ने पूरी दुनिया में भारत को क्रिकेट के क्षेत्र में अलग पहचान दिलाई थी । इतना ही नहीं , भारतीय क्रिकेट टीम को सन् 1983 में एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट श्रृंखला में विश्व - विजेता बनाने का श्रेय भी मुख्यतः उन्हीं को जाता है । 

कपिल देव का जन्म :

कपिल देव का जन्म 6 जनवरी , 1959 को चंडीगढ़ में हुआ था । उन्होंने सन् 1978 में पाकिस्तान में प्रथम टेस्ट मैच खेला । अपने खेल से वे क्रिकेट - जगत् की सनसनी बन गए थे । 

30 जनवरी , 1994 को उन्होंने अपने कॅरियर में 431 विकेट लेकर तहलका मचा दिया था । वे विश्व के महानतम ऑलराउंडर क्रिकेटरों में से एक हैं । कपिल देव ने मात्र सोलह साल की उम्र में हरियाणा की क्रिकेट टीम के सदस्य के रूप में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कदम रखा था ।

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने के बाद उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम में मध्यम - तीव्र गति के गेंदबाजों की कमी को बहुत हद तक दूर कर दिया था । वे दाहिने हाथ के मध्यम - तेज गति के गेंदबाज के रूप में उभरे । उन्होंने अपनी आउट स्विंग गेंदबाजी एवं शानदार एक्शन के कारण भारतीय टीम में अपने कॅरियर के ज्यादातर समय में स्ट्राइक गेंदबाज की भूमिका निभाई । वे दाएँ हाथ के बल्लेबाज रहे हैं । उन्हें ' ऑलराउंडर ' कहा जाता है । 

एक बार उन्होंने नेशनल स्टेडियम , कराची में पाकिस्तान के खिलाफ तीसरे टेस्ट मैच में केवल 33 गेंदों में दो छक्कों की मदद से भारत का सबसे तेज अर्धशतक बनाया था । उन्हें अर्जुन पुरस्कार , पद्मश्री व पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है । 

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद् ने ' हॉल ऑफ फेम सूची ' में उनका नाम शामिल किया है । निस्संदेह कपिल देव भारतीय खिलाड़ियों के ही नहीं , बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के प्रेरणास्रोत हैं । कपिल देव ने क्रिकेट को संकल्प एवं तन्मयता के साथ खेला और उसमें आसमान की ऊँचाइयों को छुआ।यदि किसी भी कार्य को तन - मन एवं संकल्प से किया जाए तो उस कार्य में सफलता मिलने से कोई नहीं रोक सकता ।

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