भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील सांभर झील
भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील, Bharat Ki Sabse Badi Khare Pani Ki jhil
भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील सांभर झील
हमारे देश में अनेक झीलें पाई जाती हैं । सांभर झील देश की सबसे बड़ी लवण जल अर्थात् खारे पानी की झील है । यह भारत के राजस्थान राज्य में जयपुर नगर के समीप स्थित है । इसे ' राजस्थान की साल्ट लेक ' भी कहा जाता है , क्योंकि यह झील नमक का सबसे बड़ा स्रोत है ।
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| Bharat Ki Sabse Badi Khare Pani Ki jhil |
भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील सांभर झील इन हिन्दी
इस झील से बड़े पैमाने पर नमक का उत्पादन किया जाता है । अनुमान है कि अरावली के शिष्ट और नाइस के गर्मों में भरा हुआ गाद ही नमक का स्रोत है । गाद में स्थित विलयशील सोडियम यौगिक वर्षा के जल में घुलकर नदियों द्वारा झील में पहुँचता है और जल के वाष्पन के पश्चात् झील में नमक के रूप में रह जाता है ।
इस झील से नमक उत्पादन हेतु ' सांभर ' नामक परियोजना भी चलाई जा रही है । यह झील समुद्र तल से 1,200 फीट की ऊँचाई पर स्थित है । जब यह भरी रहती है , तब इसका क्षेत्रफल 90 वर्ग मील रहता है । इसमें चार नदियाँ रूपनगर , मेंथा , खारी , खंडेला आकर गिरती हैं । नमक प्रयोगशाला और नमक संग्रहालय इस झील के देखने योग्य स्थान हैं ।
इस झील के पीछे एक पौराणिक कथा भी है , जो इस प्रकार है - महाभारत काल के दौरान ऋषि शुक्राचार्य यहाँ रहते थे । उन्होंने अपनी बेटी देवयानी का भारत के सम्राट् राजा ययाति से विवाह किया था । देवयानी मंदिर अभी तक यहाँ स्थित है । खुदाई के दौरान बड़ी संख्या में मिट्टी की मूर्तियाँ , पत्थर के पात्र और सजाए गए डिस्क पाए गए थे , जो अब जयपुर में अल्बर्ट संग्रहालय में रखे गए हैं ।
इस झील को रामसर स्थल , अर्थात् अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमि भी कहा गया है , क्योंकि यहाँ पर उत्तरी एशिया से आए पक्षी रह रहे हैं । सुंदर गुलाबी फ्लेमिंगो , सारस , पैलीकान , रेडशेंकस , टिटिहरी और काले पंखों वाला स्टिल्स यहाँ देखने लायक है । सांभर झील से हर साल लगभग 196000 टन शुद्ध नमक पैदा होता है । नमक उत्पादन का प्रबंधन सांभर साल्ट्स लिमिटेड द्वारा किया जाता है , जो हिंदुस्तान साल्ट्स लिमिटेड और राज्य सरकार का एक उद्यम है ।
सांभर झील जाने के लिए अक्टूबर से मार्च का महीना सबसे उत्तम है , क्योंकि राजस्थान एक गर्म वातावरण वाला राज्य है । इसलिए मई - जून के समय यहाँ पर घूमा नहीं जा सकता । मानसून के मौसम में आने पर यहाँ नमक की खेती देखने को नहीं मिलती , इसलिए अक्टूबर से मार्च का समय ही यहाँ पर विहार करने के लिए श्रेष्ठ है । समय मिलने पर इस झील पर अवश्य आना चाहिए और यहाँ पर नमक की खेती व नमक बनने की प्रक्रिया को देखना चाहिए ।

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