नागपुरी साहित्य के बारे में जानिये?

झारखंड का साहित्य नागपुरी साहित्य, 

दोस्तों आज इस आर्टिकल की मदद से मैं आपको नागपुरी साहित्य के बारे में बताने जा रहा हूं मुझे उम्मीद है कि नागपुरी साहित्य पर लिखी गई यह पोस्ट की मदद से आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा.. 

नागपुरी साहित्य के बारे में जानिये :

नागपुरी भाषा के उद्भव से संबंधित विषय पर विद्वानों का अलग - अलग मत रहा है । सर जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने अपने ग्रंथ ' द लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया ' में नागपुरी को भोजपुरी की एक उप बोली कहा है । प्रोफेसर केसरी कुमार सिंह ने अपने आलेख ' नागपुरी भाषा एवं साहित्य ' में मगही और मैथिली की तरह नागपुरी को भी मागधी अपभ्रंश से प्रसूत एक निश्चित भाषा कहा है । 


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डॉ . श्रवण कुमार गोस्वामी ने अपने शोध ' नागपुरी शिष्ट साहित्य ' में नागपुरी को आर्यभाषा परिवार की औरस ' संतान मानते हुए इसे अर्धमागधी अपभ्रंश से उत्पन्न माना है । नागपुरी भाषा झारखंड के राँची , लोहरदगा , गुमला , सिमडेगा , सिंहभूम , लातेहार तथा छत्तीसगढ़ के जसपुर सरगुजा , कोरवा एवं उड़ीसा के सुंदरगढ़ , क्योंझर एवं बारीपदा जिलों में तथा असम के चाय बागानों में बोली जाती है । 

नागपुरी लोक साहित्य के अंतर्गत लोकगीत , लोककथा , पहेली आदि साहित्य बहुत ही समृद्ध है । नागपुरी में ठेठ नागपुरी लोकगीत एवं बँगला मिश्रित नागपुरी गीत की प्रचुरता पाई जाती है । नागपुरी लोक कथाओं की तुलना की जाए तो वेदों के आख्यान , जातक कथाएँ , कथासरितसागर , बेताल पचीसी , सिंहासन बत्तीसी , हितोपदेश , पंचतंत्र आदि कथाओं से मिलती - जुलती प्रतीत होती हैं । 

नागपुरी शिष्ट साहित्य में गीत , कविता , कहानी , उपन्यास , नाटक , निबंध , संस्करण आदि सभी साहित्यिक विधाओं का सृजन हुआ है । नागपुरी का प्रथम कवि रघुनाथ नृपति को माना जाता है । प्रथम परंपरा के कवियों में रघुनाथ नृपति के अलावा हनुमान सिंह , बरजुराम , जय गोविंद , घासी राम , महंत घासी , कंचन आदि को माना जाता है।

इनकी रचनाएँ सगुण भक्ति धारा से संबंधित हैं । निर्गुण भक्ति परंपरा को सोबरन , महंत घासी , रूंगटु मलार , अर्जुन एवं मृत्युंजय नाथ शर्मा ने आगे बढ़ाया । आधुनिक काल के कवियों में प्रफुल्ल कुमार राय , सहनी उपेंद्र पाल नहन , शिव अवतार चौधरी , लाल रणविजय नाथ शाहदेव , डॉ . बी.पी. केसरी , रामदयाल मुंडा , गिरधारी राम गोंझू गिरिराज आदि प्रमुख हैं । 

नागपुरी गद्य साहित्य का विकास 1900 ई . के आसपास ईसाई धर्म - प्रचारकों द्वारा आरंभ माना जाता है । ई.एच. ह्विटली ने 1896 ई . में नागपुरी का प्रथम व्याकरण नोट्स ऑन दि गँवारी डायलेक्ट ऑफ लोहरदगा , छोटानागपुरी ' लिखा , जिसे नागपुरी में गद्य साहित्य का प्रारंभ माना जाता है । 

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नागपुरी साहित्य में अनेक रचनाएँ की गईं , जो निम्नलिखित हैं - 

नागवंशावली , नागपुरी फागशतक , लाल रंजना , दुर्गाशप्तशती , नागवंशावली , झूमर , सुदामा चरित्र , कृष्ण चरित्र , महाभारत , लंका कांड , उषा हरण , फोगली बुढ़िया कर कहानी , श्रीकृष्ण चरित , नोट्स ऑन दि गँवारी डायलेक्ट ऑफ लोहरदगा , छोटानागपुर ( व्याकरण ) , ग्रामर ऑफ दि नागपुरिया सदानी लैंग्वेज , नेरूआ लोटा उर्फ सांस्कृतिक अवधारणा ( निबंध ) , ठाकुर विश्वनाथ शाही ( लघु नाटक ) , कांटी ( कहानी - संग्रह ) . सेवा और नौकरी ( एकांकी नाटक ) , तेतर की छाँह , मरङ गोमके : जयपाल सिंह , महाराजा मदरा मुंडा , सोनझइर ( कहानी - संग्रह ) , काका कर कहनी , खुंखड़ी रूगड़ा आदि |


दोस्तों उम्मीद करते हैं कि नागपुरी साहित्य पर लिखी गई यह पोस्ट आपको जरूर पसंद आई होगी अगर आपको इस पोस्ट की मदद से कुछ नया सीखने को मिला हो तो हमें बहुत खुशी है और अगर आप का नागपुरी साहित्य से जुड़ी कोई भी सवाल है तो आप हमसे कमेंट में अपना सवाल पूछ सकते हैं |

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