शीशम का पेड़ इन हिंदी, sheesham ke ped in hindi
शीशम का पेड़ इन हिंदी, sheesham ke ped in hindi
शीशम का पेड़ केवल प्रकृति को ही स्वच्छ व हरा - भरा नहीं रखते हैं , अपितु प्राणी जगत के लिए वेहद उपयोगी होते हैं । शीशम भारतीय उपमहाद्वीप का वृक्ष है
| शीशम का पेड़ इन हिंदी sheesham ke ped in hindi |
शीशम का पेड़ इन हिंदी, sheesham ke ped in hindi
शीशम का पेड़ के बारे में हिंदी में जानिये
शीशम का पेड़ केवल प्रकृति को ही स्वच्छ व हरा - भरा नहीं रखते हैं , अपितु प्राणी जगत के लिए वेहद उपयोगी होते हैं । शीशम भारतीय उपमहाद्वीप का वृक्ष है । इसका वानस्पतिक नाम डलबर्जिया सिसो है । 10-12 वर्ष के पेड़ के तने की गोलाई 70-75 व 25-30 साल के पेड़ के तने की गोलाई 135 सेमी . तक हो जाती है ।शीशम के पेड़ की ऊंचाई कितनी होती है :
इसका वृक्ष लगभग 30 मीटर तक ऊँचा मध्यमा आकार का होता है । इसकी लकड़ी भारी , बेहद मजबूत व बादामी - सा रंग लिये होती है । इसकी शाखाएँ चिकनी होती हैं । इसकी लकड़ी से बहुधा फर्नीचर का निर्माण किया जाता है । शीशम की लकड़ी से बना फर्नीचर उम्दा कोटि का होता है इस वृक्ष की लकड़ी बहुत महँगी होती है ।
शीशम की लकड़ी का इस्तेमाल :
इसका प्रयोग इमारतें बनाने में भी किया जाता है । यह बहुपयोगी वृक्ष है । इसकी लकड़ी , पत्तियाँ , जड़ें सभी काम में आती हैं । पत्तियाँ पशु - पक्षियों के लिए प्रोटीनयुक्त चारा होती हैं । इसकी पत्तियाँ व शाखाएँ वर्षा जल की बूंदों को धीरे - धीरे जमीन पर गिराकर भूजल भंडार को बढ़ाती हैं ।
शीशम की बीज कब मिलेगी :
इसके बीज दिसंबर - जनवरी के महीने में पेड़ों से मिलते हैं
एक शीशम के पेड़ से कितने किलो बीज मिल जाते हैं
एक पेड़ से एक - दो किलो बीज मिल जाते हैं । इन बीजों से नर्सरी में पौधे तैयार किए जाते हैं ।
शीशम के पेड़ कब लगाना चाहिए या शीशम का बीज कब होते हैं :
नर्सरी में बीज लगाने का समय फरवरी - मार्च है ।
शीशम के पेड़ के फायदे :
शीशम के वृक्ष में औषधीय गुण भी हैं । इसके पत्तों से निकलने वाले चिपचिपे पदार्थ का बहुत सारे रोगों के उपचार में इस्तेमाल किया जाता है ।
शीशम का तेल का उपयोग :
इसका तेल अनेक बीमारियों को दूर करता है । शीशम के तने में तेल , इसकी फलियों में टैनिन और बीजों में भी एक स्थिर तेल पाया जाता है । इसका तेल दर्दनाशक , अवसादरोधी , सड़न रोकने वाला , कीटनाशक और स्फूर्तिदायक होता है । इसके तेल का सेवन करने से अवसादग्रस्त व्यक्तियों को कुछ ही देर में आराम मिल जाता है ।
इसके तेल के सेवन से व्यक्ति के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है । यदि दाँतों में दर्द हो या फिर जोड़ परेशान कर रहे हों तो उस समय भी शीशम का तेल तुरंत राहत प्रदान करता है । शीशम कड़वा , गर्म , तीखा , सूजन , सफेद दाग , उलटी , पेड़ के कीड़े खत्म करने वाला , फोड़े - फुसी , खून की गंदगी तथा कफ को नष्ट करता है ।
शीशम के पेड़ को लगाने का सही स्थान :
शीशम के पेड़ सड़क - रेल मार्ग के दोनों ओर , खेतों की मेड़ , स्कूल व पंचायत भवन तथा पार्क आदि में लगाए जा सकते हैं । ऐसे पेड़ों को अधिक से अधिक संख्या में लगाकर न केवल वातावरण को साफ रखा जा सकता है , बल्कि अनेक बीमारियों को भी दूर किया जा सकता है । इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को शीशम के वृक्ष को लगाने में योगदान करना चाहिए ।
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